GDPR (जनरल डाटा प्रोटेक्शन रेगुलेशन) क्या है? पूरी जानकारी हिंदी में

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नमस्कार दोस्तों, GDPR (जनरल डाटा प्रोटेक्शन रेगुलेशन) हर एक इंटरनेट यूजर के लिए बहुत इम्पोर्टेन्ट पालिसी है और हम आज विस्तार से जानेंगे की GDPR क्या है? GDPR के बारे में हिंदी में जानकारी और इसके पॉलिसीस, फाइन/पेनल्टी किसके लिए है और क्यों है?

अभी कुछ समय पहले फेसबुक – Cambridge Analytica Scandal के बारे में हम सभी ने सुना, इसमें करोडो यूजर के पर्सनल इनफार्मेशन लीक हुए, यहाँ तक माना जाता है की पिछले साल US इलेक्शन में इन सभी इनफार्मेशन का यूज़ किया गया था।

ऐसे में सभी देशो की सरकार और वहाँ की जनता को डाटा प्रोटेक्शन को लेकर बहुत चिंता में होने लगी है कि अगर आगे भी ऐसा रहा तो किसी भी देश का फ्यूचर खतरे में पड़ सकता है और अरबो रुपये का नुकसान हो सकता है। इसलिए जनरल डाटा प्रोटेक्शन रेगुलेशन यानि GDPR को फिर से अपडेट किया गया और इसके टर्म, पालिसी को पहले से काफी बेहतर बनाया गया है। चलिए इसके बारे में थोडा विस्तार से जानते है।

GDPR क्या है?

General Data Protection Regulation जिसे हम ज्यादातर “GDPR” के नाम से जानते है। इसे यूरोपियन यूनियन द्वारा डाटा प्रोटेक्शन के लिए 2016 में बनाया गया था। लेकिन इसका इम्प्लीमेंटेशन इस साल 2018 में किया गया है।

GDPR Law, यूरोपियन यूनियन में UK, Germany, France, Italy, Belgium, Norway, Poland, Spain, Sweden, Greece, Austria सहित और जितने भी यूरोपियन यूनियन मेंबर्स है उनके हर एक सिटीजन के लिए मान्य है।

इस Law को बनाने का मेन एम है, यूजर के पास उनके पर्सनल डाटा का कण्ट्रोल देना है और इसे और आसान बनाना ताकि यूजर के डाटा के साथ फिर कोई प्रॉब्लम ना हो सके और आगे डाटा लीक जैसे समस्या से बचा जा सके।

यह Law अभी केवल यूरोपियन यूनियन में इम्प्लीमेंट किया गया है और हो सकता है जल्दी हमारे देश में भी GDPR लॉ को इम्प्लीमेंट कर दिया जाये। अभी यह 25 May 2018 ही इम्प्लीमेंट किया गया है और दुनिया की सभी बड़ी कम्पनीज जैसे की फेसबुक, गूगल, लिंकेडीन, ट्विटर ने अपने यूजर को इसके बारे में इनफार्मेशन प्रोवाइड कर दिया है की हम GDPR Law को फॉलो करते है।

GDPR क्या है? इसके बारे में हमें, पता चल गया है और अब हमें थोडा जानते है. यह किस तरह के डाटा को प्रोटेक्ट करेगा? इसके पॉलिसीस क्या है? और इससे इंटरनेट यूजर को किस तरह से फायदा होने वाला है। इसके बार में FAQs में माध्यम से समझेंगे।

पर्सनल डाटा क्या है?

जब भी इंटरनेट पर किसी वेबसाइट/एप्लीकेशन पर अपना अकाउंट क्रिएट करते है। तो हम वहा पर नाम, एड्रेस, इंटरेस्ट के साथ-साथ जरुरत पढ़ने पर बैंक/इनकम, हेल्थ, इन्शुरन्स, कल्चर जैसे और भी बहुत से इनफार्मेशन के बारे में जानकारी प्रोवाइड करते है। GDPR Law के हिसाब से ये सभी पर्सनल डाटा के अंतर्गत आते है।

Data Protection Rule को क्यों चेंज किया गया?

ओल्ड डाटा प्रोटेक्शन एक्ट में बहुत से पॉलिसीस मिसिंग थे और साथ में अभी जल्दी में जो फेसबुक यूजर के साथ हुआ है उसे देखते हुए डाटा प्रोटेक्शन रूल को चेंज किया गया है। रूल को चेंज करने से पहले एक सर्वे किया गया और उस सर्वे में केवल 15% लोगो ने कहा की जो वह डाटा इंटरनेट पर शेयर करते है उनका पूरा कण्ट्रोल उनके पास होता है।

GDPR Policies क्या है ?

यह पालिसी स्पेशली उन कम्पनीज के लिए है, जो की यूजर के पर्सनल डाटा को सेव करते है और उसका इस्तेमाल अपने पर्सनल बेनिफिट के लिए करते है। लेकिन अब उनको एक डाटा का हिसाब देना होगा, जैसे की…

Communication: अगर यूजर किसी भी सर्विस में रजिस्टर करता है तो कम्पनीज की यह जिम्मेदारी है की वह उसे आसान भाषा में बताये की वह कौन है और हमारा डाटा क्यों ले रहे है? इसके साथ कम्पनीज को ये भी बताना होगा की हमारे डाटा के साथ क्या करेंगे? अपने डाटा बेस में कब सेव रखेंगे और किसके साथ शेयर करेंगे।

Constent: किसी यूजर का पर्सनल डाटा यूज़ करने से पहले उसका सहमति जरुरी है और अगर कोई बच्चा है तो उसके पैरेंट की सहमति जरुरी है।

Warning: किसी भी डाटा ब्रांचेस के समय अगर कोई रिस्क है तो इसके बारे में लोगो को तुरंत जानकारी देना होगा।

Erase Data: अगर किसी व्यक्ति को अपना पर्सनल इनफार्मेशन डिलीट करना है, तो उसके पास यह राइट होना चाहिए और यूजर के कहने पर उसके सभी पर्सनल डाटा कंपनी डिलीट कर देगा।

Safegaurding Senstive data: जितने भी सेंसटिव डाटा है उनको प्रिवेंट करने करने के लिए सभी कम्पनीज को एक्स्ट्रा सेफ़गार्ड की जरुरत है। जैसे की हेल्थ से रिलेटेड डाटा, सेक्सुअल डाटा, रिलिजन और पोलिटिकल डाटा।

अगर कम्पनीज GDPR का पालन नहीं करते है? तो,

ऐसी कोई भी कंपनी जो की GDPR Law का पालन नहीं करती हैं तो उनके लिए भी कुछ रूल्स है। जैसे की..

जो भी कंपनी GDPR को फॉलो नहीं करता है तो उसके वर्ल्ड वाइड टर्नओवर का 4% Sanctioned हो सकता है या फिर 20 मिलियन यूरो फाइन के रूप में देना पड़ सकता है।

GDPR

GDPR Law से ब्लॉगर पर क्या इफ़ेक्ट पड़ेगा?

हमें सभी ने WHOIS वेबसाइट का यूज़ करके किसी भी वेबसाइट/ब्लॉग के ओनर के सभी पर्सनल इनफार्मेशन के बारे में जानकारी हासिल कर लेते है। ऐसा इसलिए संभव है क्योकि सभी होस्टिंग प्रोवाइडर्स हमारे इनफार्मेशन को पब्लिक कर देते है।

ऐसे में GDPR डाटा प्रोटेक्शन लॉ आ जाने से अब कोई भी होस्टिंग सर्विसेज हमारे इनफार्मेशन को पब्लिक नहीं कर सकते है। इससे हमारे पर्सनल इनफार्मेशन सेफ रहेगा। यहाँ ताकि वर्डप्रेस भी अपने सभी यूजर के इनफार्मेशन को सेव करता है अब उसको भी जवाब देना पड़ेगा और GDPR के हिसाब से काम करना होगा।

दोस्तों, GDPR (जनरल डाटा प्रोटेक्शन रेगुलेशन) आ जाने यूजर और कम्पनीज दोनों का फायदा होगा। यूजर को अपने पर्सनल डाटा पर फुल कण्ट्रोल मिल जायेगा और कम्पनीज जो इससे पहले बहुत से डाटा प्रोटेक्शन लॉ और साइबर लॉ के साथ काम करते थे उन्हें बस अब एक लॉ GDPR के साथ काम करना होगा। अभी तक जब कोई कंपनी अपना पालिसी बनती थी तो बहुत से लॉ होने के कारण वह इतना बड़ा हो जाता था की यूजर उसे पढ़ते नहीं थे लेकिन अब हमें एक छोटा और बढ़िया डाटा प्रोटेक्शन पालिसी देखने को मिलेगा जो हमारे लिए बेस्ट डाटा प्रोटेक्शन लॉ हो सकता है।

Best Thanks to Satish Bhai, Complete This Post

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