Dil ki Baat {School Love Story}

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यह लाइन तथ्यों और कल्पना का मिश्रण है इसका वास्तविक जीवन से कुछ लेना देना नहीं है… 😀

दिल की बात शायरी में लिख दूं मैं सुना तो कर,
कल को जो थी डायरी में आज है जुबान पर।
4 साल कब ये बीते कुछ भी न पता चला,
सारी गलती मेरी बस चल दिया मैं मान कर।

तेरी मेरी लव स्टोरी दिल में मेरे जिंदा है,
कभी कभी सपनो में ये दिल भी तुझसे मिलता है।
असर हुआ गज़ब हुआ नज़र से जब नज़र मिली,
स्कूल का वो दिन जब तेरे इश्क की खबर मिली।

पहली बार जब मिला तो स्कूल को मैं लेट था,
कान पकड़े मैं खड़ा और प्रिंसिपल का गेट था।
पहली बार देखते ही प्यार हो गया था मुझको,
बज रहे थे 1:45 समय था लंच ब्रेक का।

ज़मीन खिसकी पैरो के नीचे से मेरे इस कदर,
ऐसा लग रहा था दिन में चाँद आया हो नज़र।
मुझको तू पसंद थी हज़ार चुनते चुनते,
मैं सुबह का करता शाम तेरी बात सुनते सुनते।

दिल पे कुछ असर किया था तेरी उस आवाज़ ने,
मैं सारे काम छोड़ घूमता था क्लास में।
तू मुस्कुरा के देखती थी जितनी दफा मुझे,
फिर आँखें बात करती थी बिना किसी जुबान के।

स्कूल में न आती तो मैं बैठे बैठे उब जाता,
खाली खाली दिल ये रहता दिन भी साला डूब जाता।
दिल में क्या था काश तुझसे मैं ये पूछ पाता,
दिल की सारी बात तेरे सामने मैं भूल जाता।

हार्ट बीट तेज़ मेरी साँसें थम जाती थी,
उड़ गए थे होश जब चल के तू पास आती थी।
बोलती न कुछ तू बस पहेलियाँ बनाती थी,
तेरे दिल की बात तेरी सहेलियां बताती थी।

आ गया था प्यार में जब ये बेकसूर दिल ये,
फिर भी कितना नासमझ था साल बेवकूफ दिल ये।
मैं खुद से तेरी बातें बना बना के करता था,
नींद ना थी आँखों में जगा जगा से रहता था।

पास होक भी ना जाने दोनों कितने दूर थे,
बेवजह ही दोनों एक दुसरे को घूरते।
मुंह फुलाके बैठ जाते छोटी छोटी बात पर हम,
बेवजह ही मान जाते बेवजह ही रूठते।

आँखे भर गयी है मेरी दिल से पर सही हु मैं,
मुड़ के देख ले ज़रा सा आज भी यही हु मैं।
कैसे भूल जाती है तू प्यार वाले लम्हों को,
ऐसा लग रहा है तुझको याद भी नहीं हु मैं।

याद है जब स्कूल बस में बैठते से साथ में,
याद है जब चैट करते थे हम आधी रात में।
कितनी नासमझ थी तूने समझा ही नहीं था,
की मैं धीरे धीरे डूबता ही जा रहा था प्यार में।

याद है जब तू छोटी छोटी बातो पे तू लड़ती थी,
याद है जब तू बारिश को देख के तू डरती थी।
अपना सब कुछ छोड़ मिलना तुझसे चाहता था,
वह वक़्त था कुछ और जब प्यार तू मुझसे करती थी।

कोई दूसरा नहीं था प्यार में जब हम दो थे,
कैसे भूल जाऊ वो गुज़ारे हमने पल जो थे।
4 साल बीते तूने मुड़ के भी न देखा,
अब हालात अपने वो नहीं हालात अपने कल जो थे।

न जाने क्यु है दूर तू नाराज़ मेरी बात से,
जो जिंदगी है बाकि चल गुजारते है साथ में।
मैंने भी कितनो को दिल देके देखा,
पर आजतक तेरे जैसी मिली ना तेरे बाद में।

तू हँस देती बस एक दफा मेरी ज़ख्मो पे मलहम सा लगे,
मैं प्यार में इतना डूब गया की हर एक ज़ख्म भी कम सा लगे। …

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