Baarish – The Ultimate Feelings (याह्या)

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baarish the ultimate feelings

आज बारिश की ताज़गी ने तुम्हारी याद सी दिला दी, तुम कहती थी न तुम्हे बारिश बहुत पसंद है, तो जैसे ही पहली बूँद सर पर गिरी तुम्हारी याद सी आ गयी। कुछ किस्से याद आ गए, जैसे, याद है कैसे तुम्हारे चेहरे की तरफ देखकर खोया-खोया सा रहता था, बिन वजह मुस्कुराया करता था। तुम पूछा करती थी क्या देख रहे हो इस बात से बिलकुल अनजान बनने की कोशिश की तुम्हे देख रहा हु। क्यु न देखता तुम्हे, उन आँखों को जो कहानिया सुनाते-सुनाते उन्हें जिया भी करती थी, कभी-कभी खुशी के मारे इतनी बड़ी हो जाया करती थी मानो ऐसा लगे किसी तारे ने जन्म लिया हो। तो कभी अपने ही आंसुओ के बोझ के तले छोटी हो जाया करती थी।

और जानबूझकर अपनी लटो को अपनी कानो के पीछे करने की आदत तुम्हारी, की बार-बार तुम अपनी झुमके दिखाना चाहती हो। तुम चाहती थी मै उनकी तारीफ करू है न, तुम्हे उनपर बहुत गुरुर है बिलकुल अपने ईमानदारी की तरह। फिर अचानक ही तुम कभी-कभी पूछ लेती थी, प्यार क्यों करते हो? मानो सवाल में कही डर सा छुपा हो, कही कुछ ऐसा न कह दू जो तुम्हे प्यार की आश दे। एक ऐसा प्यार जो तुम कर चुके हो, एक ऐसा प्यार जो तुम खो चुके हो। पर तुम फिर भी तुम सुनना चाहती हो, क्युकी सुने बिना तो तुमसे रहा नहीं जाता। या फिर ऐसे प्यार की चाह तुम में आज भी जिन्दा है।

खैर, जो भी है मै कुछ नहीं कह पाता था। क्युकी क्या कहता सारा कसूर तुम्हारी आँखों पे थोप देता, या फिर तुम्हारे नादान हरकतों पे, तुम्हारी मुस्कान की वजह कह देता या फिर तुम्हारी कहानियो को। एक वजह समझ में आये मै बता भी देता, पर नहीं पता था तो एक बेवकूफ की तरह मुस्कुराता रहता था। पर फिर भी तुम कहा समझती हो, आज भी यही सोचती हो की इस रिश्ते के दायरे बढ़ाने से इस रिश्ते को ही न गवा बैठो। तुम आज भी यही कहती हो की प्यार शायद हमे पास नहीं, दूर करदे। इसलिए बहुत सोच समझ के घूमती हो मेरे साथ, थोड़ा दूर ही रखती हो मुझे खुद से, ताकि थोड़ा काम ही प्यार करू तुमसे। ताकि मेरे नसीब थोड़ा काम दर्द आये, ताकि ये रिश्ता थोड़ा लम्बा ही चले। जैसे है वैसा ही रहे। प्यार से छेड़खानी का, पर प्यार का नहीं।

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